Indian Manuscripts
Largest Online Collection of Indian Manuscripts & Antique Books

उद्देश्य

indianmanuscripts.com

संसार की भारतीय पांडुलिपियों की सबसे बड़ी वेबसाइट

हम indianmanuscripts.com वेबसाइट के निर्माता समस्त विश्व के शोधकर्ताओं और विद्वानों को तथा दुनिया के सबसे प्राचीन ज्ञान की खोज करने वाले जिज्ञासुओं को सम्मान पूर्वक यह वेबसाइट indianmanuscripts.com समर्पित करते हैं ।

भारत ज्ञान की अद्वितीय् विरासत का देश हैं वर्तमान से लगभग दस हज़ार वर्षो पूर्व हमारे ऋषियों ने “ऋग वेद” लिखा था जो की संसार की सबसे प्राचीन लिखित पुस्तक है । भारत में विद्वता की परंपरा ने इस देश में ज्ञान के, विज्ञान के सभ्यता के, संस्कारो के, कला, संस्कृति, साहित्य के अनमोल ग्रंथो को लिपिबद्ध किया है । प्रायः दुनियाँ के अधिकांश देश जब लिखना भी नहीं जानते थे तब ईसा से हजारों साल पहले से भारत देश ने प्राच्य ज्ञान के अद्भुत ग्रंथो को लिख डाला था 18वी शताब्दी तक भारत के ऋषि,मुनियों,साधु-संतो विद्वानों और विद्यार्थियों ने अटूट मेहनत और लगन के साथ कभी भोजपत्र पर तो कभी ताड़ के पत्तों पर, कभी रुई से बनाए हुए काग़ज पर तो कभी वनस्पतियों से बनाए गए काग़ज पर केले के रस मे काजल को घोलकर बनाई गई स्याही से लिखा । तो कभी किसी राजा-महाराजा के लिए सोने को पिघलाकर बनाई गई स्याही से अक्षर उकेरे  ।

 

indianmanuscripts.com न सिर्फ भारतीय भाषाओं की पांडुलिपियों और वर्ष 1947 मे Republic of India (भारत) मिली स्वतंत्रता से पूर्व की छपी भारतीय पुस्तकों की विश्व की सबसे बड़ी वेबसाइटस मे से एक प्रमुख और सबसे बड़ी वेबसाइट है बल्की विश्व की यह अपने तरह की एकमात्र अकेली वेबसाइट है जिसने बड़ी मेहनत से अलग-अलग विषयों के प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों को वर्गीकृत कर उन्हें अलग-अलग Categorised (श्रेणियों)  मे सहेजा है साथ ही यह दुनियाँ की अकेली ऐसी वेबसाइट है जिसने हर पांडुलिपि को उसके विषय-वस्तु के अनुसार एक आकर्षक कवर पृष्ट भी दिया है जिस पर ग्रंथ का पूर्ण विवरण है

 

इस वेबसाइट का निर्माण करना बहुत कठिन, श्रमसाध्य तथा खर्चीला काम रहा है । भारत जैसे विशाल देश के कोने-कोने में जाकर पांडुलिपियों की उपलब्धता की जानकारी जुटाना और फिर तमाम आरज़ू मिन्नतों के बाद टीम के सदस्यो को भेजकर पांडुलिपियों को स्कैन करवाना, उनका अध्यन करवाना, उन्हे वर्गीकृत करना और फिर विषय के अनुसार उनका कवर पृष्ट बनाकर वेबसाइट मे अपलोड किया गया है

 

indianmanuscripts.com किसी भी प्राचीन भारतीय ग्रंथ के क्रय-विक्रय को प्रोत्साहन नही देती है और इस वेबसाइट का उद्देश्य पुस्तकों का विक्रय करना भी नही है किन्तु यदि किसी शोधकर्ता अथवा जिज्ञासू को कोई पुस्तक निज के अध्ययन के लिए चाहिये तो उसे एक Undertaking देनी होगी की पुस्तक वह निज अध्ययन के लिए चाहता है और उसका कोई Commercial प्रयोग अथवा redistribution नही करेगा तथा ऐसा करने पर वह वांछित पुस्तक की छाया प्रतिबद्ध पुस्तक वह 10रू. प्रति पृष्ट के मूल्य पर जिस स्तिथि में वह पुस्तक वेबसाइट में Uploded है ठीक उसी स्तिथि में  प्राप्त कर सकता है जिसके लिए वह फोन नं.0755-2972330 पर अथवा ई-मेल आई डी  indianmanuscripts@gmail.com  पर संपर्क कर सकता है ।

 

इस मेहनत भरे अथक प्रयास के पीछे हमारे दो पवित्र उद्देश्य है, प्रथम बिना किसी शुल्क अथवा राशि के संसार भर के सभी भारतीय ज्ञान के शोधकर्ताओं और जिज्ञासुओं को निशुल्क ऑनलाइन पढ़ने के लिए प्राचीन पांडुलिपियाँ और पुस्तकें उपलब्ध करवाना ताकी भारतीय प्राचीन ज्ञान पर दुनियाँभर मे शोधकार्य कर अपने मौलिक चिंतन और चिरंतर तप, साधना, अभ्यास और गणना कर लिखे गए इन अति दुर्लभ मूल प्राचीन ग्रंथो को डिजिटलाईज कर उन्हें हमेशा-हमेशा के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास करना ताकी भारत की यह धरोहर विश्व की धरोहर बने और कभी विश्व गुरु कहलाने वाला भारत एक बार फिर से संसार मे विश्व गुरु की प्रतिष्ठा प्राप्त करे ।